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Bramhpuran

GLOBAL HINDUISM

brmhapuran|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||
ब्रह्मपुराण
अध्याय – १२
ग्रहों तथा भुव: आदि लोकों की स्थिति, श्रीविष्णुशक्ति का प्रभाव तथा शिशुमारचक्र का वर्णन
मुनियों ने कहा – महाभाग लोमहर्षणजी ! अब हम भुव: आदि लोकों का , ग्रहों की स्थिति का तथा उनके परिमाण का यथार्थ वर्णन सुनना चाहते हैं | आप कृपापूर्वक बतलायें |
लोमहर्षणजी बोले – सूर्य और चन्द्रमा की किरणों से समुद्र, नदी और पर्वतोंसहित जितने भाग में प्रकाश फैलता हैं, उतने भाग को पृथ्वी कहते हैं | पृथ्वी विस्तृत होने के साथ ही गोलाकार हैं | पृथ्वी से एक लाख योजन ऊपर सूर्यमंडल की स्थिति हैं और सूर्यमंडल से लाख योजन दूर चन्द्र्मंद्ल स्थित है | चंद्रमंडल से लाख योजन ऊपर सम्पूर्ण नक्षत्रमंडल प्रकाशित होता है | नक्षत्रमंडल से दो लाख योजन ऊँचे बुध की स्थिति है | बुध से दो लाख योजन शुक्र स्थित हैं | शुक्र से दो लाख योजन मंगल, तथा मंगल…

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